कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान

NCERT Class 10 अर्थशास्त्र Chapter 4 वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था Notes in Hindi

NCERT 10 Class अर्थशास्त्र Chapter 4 वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था Notes in hindi

NCERT Class 10 अर्थशास्त्र Chapter 4 वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था Notes in hindi. जिसमे वैश्वीकरण , वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था , वैश्वीकरण को संभव बनाने वाले कारक ,बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ I

Table of Contents

मुक्त व्यापार , बहुराष्ट्रीय कंपनियां , विदेश व्यापार और बाजारों का एकीकरण , विश्व व्यापार संगठन , भारत और वैश्वीकरण , न्यायसंगत वैश्वीकरण के लिए प्रयास आदि के बारे में पढेगे।

TextbookNCERT
ClassClass 10
Subjectअर्थशास्त्र Economics
ChapterChapter 4
Chapter Nameवैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था
CategoryClass 10 अर्थशास्त्र Notes in Hindi
MediumHindi
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NCERT Class 10 Economics Chapter 4 वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था Notes in hindi

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📚 अध्याय = 4 📚
💠 वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था 💠

❖ वैश्वीकरण व भारतीय अर्थव्यवस्था :-

परिचय :-
1. वैश्वीकरण क्या है?
2. विदेशी व्यापार क्या है?
3. निवेश क्या है? – देशी निवेश व विदेशी निवेश
4. बहुराष्ट्रीय कम्पनी
5. वैश्वीकरण का भारत पर प्रभाव


⚬​​​​​​​ वैश्वीकरण – 

एक देश की अर्थव्यवस्था का दुसरे देश की अर्थव्यवस्था के साथ मिलना विश्व की अर्थव्यवस्था का आपस में जुड़ना या मिलना
⚬​​​​​​​ आज विश्व के अधिकांश क्षेत्र – सांस्कृतिक, सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक क्रियाओं की वजह से आपस में जुड़ रहे है।
​​​​​​​⚬​​​​​​​ उपभोक्ता के रूप में हमारे सामने वस्तुओं और सेवाओं के कई विकल्प है
​​​​​​​⚬​​​​​​​ विश्व के बड़े विनिर्माताओं द्वारा निर्मित डिजिटल कैमरे, मोबाइल फोन और टेलीविजन के नवीनतम मॉडल हमारे लिए सुलभ है


​​​​​​​⚬​​​​​​​ हमेशा भारत की सड़कों पर गाड़ियों के नए मॉडल देखे जा सकते हैं वो दिन गुजर गए जब भारत की सड़कों पर केवल एम्बेसडर और फिएट कारें ही दिखाई देती थीं आज भारतीय विश्व की लगभग सभी शीर्ष कंपनियों द्वारा निर्मित कारें खरीद रहे हैं
​​​​​​​⚬​​​​​​​ अनेक दूसरी वस्तुओं के ब्रांडों में भी इसी प्रकार की तीव्र वृद्धि देखी जा सकती है – कमीजों से लेकर टेलीविजनों और प्रसंस्करित फलों के रस तक हमारे बाजारों में वस्तुओं के बहुव्यापी विकल्प अपेक्षाकृत नवीन परिघटना है दो दशक पहले भी आपको भारत के बाजारों में वस्तुओं की ऐसी विविधता नहीं मिलेगी कुछ ही वर्षों में हमारा बाजार पूर्णत: परिवर्तित हो गया है

❏ अन्तरदेशीय उत्पादन :-


​​​​​​​⚬​​​​​​​ 20वीं शताब्दी के मध्य तक उत्पादन मुख्यत: देशों की सीमाओं के अंदर ही सीमित था
​​​​​​​⚬​​​​​​​ देशों की सीमाओं को लांघने वाली वस्तुएँ – कच्चा माल, खाद्य पदार्थ और तैयार उत्पाद ही थे
​​​​​​​⚬​​​​​​​ भारत जैसे उपनिवेशों से कच्चा माल एवं खाद्य पदार्थ निर्यात होते थे और तैयार वस्तुओं का आयात होता था
​​​​​​​⚬​​​​​​​ व्यापार ही दूरस्थ देशों को आपस में जोड़ने का मुख्य जरिया था यह बड़ी कंपनियों, जिन्हें बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ कहते हैं परिदृश्य पर उभरने से पहले का युग था

❏ बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ –


​​​​​​​⚬​​​​​​​ एक बहुराष्ट्रीय कंपनी वह है, जो एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण अथवा स्वामित्व रखती है बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ उन प्रदेशों में कार्यालय तथा उत्पादन के लिए कारखाने स्थापित करती हैं
​​​​​​​⚬​​​​​​​ जहाँ उन्हें सस्ता श्रम एवं अन्य संसाधन मिल सकते हैं
​​​​​​​⚬​​​​​​​ उत्पादन लागत में कमी करने तथा अधिक लाभ कमाने के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ ऐसा करती है

❏ एक बहुराष्ट्रीय कंपनी द्वारा उत्पादन का विस्तार :-

  • ​​​​​​​⚬​​​​​​​ औद्योगिक उपकरण बनाने वाली एक बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनी संयुक्त राज्य अमेरिका के अनुसंधान केन्द्र में अपने उत्पादों का डिजाइन तैयार करती है
  • ​​​​​​​⚬​​​​​​​ उसके पुर्जें चीन में विनिर्मित होते है
  • ​​​​​​​⚬​​​​​​​ फिर इन्हें जहाज में लादकर मेक्सिकों और पूर्वी यूरोप ले जाया जाता है
  • ​​​​​​​⚬​​​​​​​ जहाँ उपकरण के पुर्जों को जोड़ा जाता है और तैयार उत्पाद को विश्व भर में बेचा जाता है
  • ​​​​​​​⚬​​​​​​​ इस बीच, कंपनी की ग्राहक सेवा का भारत स्थित कॉल सेंटरों के माध्यम से संचालन किया जाता है
  • ​​​​​​​⚬​​​​​​​ इस उदाहरण में बहुराष्ट्रीय कंपनी केवल वैश्विक स्तर पर ही अपना तैयार उत्पाद नहीं बेच रही है बल्कि अधिक महत्त्वपूर्ण यह है कि वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन विश्व स्तर पर कर रही है परिणामत: उत्पादन प्रक्रिया क्रमश: जटिल ढंग से संगठित हुई है


​​​​​​​⚬​​​​​​​ उत्पादन प्रक्रिया छोटे भागों में विभाजित है और विश्व भर में, फैली हुई है चीन एक सस्ता विनिर्माण केन्द्र होने का लाभ प्रदान करता है
​​​​​​​⚬​​​​​​​ मेक्सिको और पूर्वी यूरोप, अमेरिका और यूरोप के बाजारों से अपनी निकटता के कारण लाभप्रद हैं
​​​​​​​⚬​​​​​​​ भारत में अत्यंत कुशाल इंजीनियर उपलब्ध है जो उत्पादन के तकनीकी पक्षों को समझ सकते है
​​​​​​​⚬​​​​​​​ यहाँ अंग्रेजी बोलने वाले शिक्षित युवक भी है, जो ग्राहक देखभाल सेवायें उपलब्ध करा सकते हैं
​​​​​​​⚬​​​​​​​ ये सभी चीजें बहुराष्ट्रीय कंपनी की लागत का लगभग 50-60% बचत कर सकती हैं
​​​​​​​⚬​​​​​​​ अत: वास्तव में सीमाओं के पार बहुराष्ट्रीय उत्पादन प्रक्रिया के प्रसार से असीमित लाभ हो सकता है

❏ विश्व – भर के उत्पादन को एक-दूसरे से जोड़ना :-

  • ​​​​​​​⚬​​​​​​​ बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ निम्न स्थान पर स्थापित होती है – जो बाजार के नजदीक हो  जहाँ कम लागत पर कुशल और अकुशल श्रम उपलब्ध हो जहाँ उत्पादन के अन्य कारकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो बहुराष्ट्रीय कपंनियाँ सरकारी नीतियों पर भी नजर रखती है, जो उनके हितों का देखभाल करती है
  • ​​​​​​​⚬​​​​​​​ इन परिस्थितियों को सुनिश्चित करने के बाद ही बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ उत्पादन के लिए कार्यालयों और कारखानों की स्थापना करती है
  • ​​​​​​​⚬​​​​​​​ परिसंपत्तियों जैसे – भूमि, भवन, मशीन और अन्य उपकरणों की खरीद में व्यय की गई मुद्रा को निवेश कहते है
  • ​​​​​​​⚬​​​​​​​ विदेशी निवेश – बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किए गए निवेश को विदेशी निवेश कहते हैं कोई भी निवेश इस आशा से किया जाता है कि ये परिसंपत्तियाँ लाभ अर्जित करेंगी कभी-कभी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ इन देशों की स्थानीय कंपनियों के साथ संयुक्त रूप से उत्पादन करती है

❏ संयुक्त उत्पादन से स्थानीय कंपनी को दोहरा लाभ होता है-


1. बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ अतिरिक्त निवेश के लिए धन प्रदान करती है जैसे – तीव्र उत्पादन के लिए मशीनें खरीदने के लिए
2. बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ उत्पादन की नवीनतम प्रौद्योगिकी अपने साथ लाती है बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निवेश का सबसे आम रास्ता स्थानीय कंपनियों को खरीद कर अपने उत्पादन का प्रसार करना है


​​​​​​​⚬​​​​​​​ अपार संपदा वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ यह आसानी से कर सकती है जैसे – एक बहुत बड़ी अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी कारगिल फूड्स ने परख फूड्स जैसी छोटी भारतीय कंपनियों को खरीद लिया है
​​​​​​​⚬​​​​​​​ परख फूड्स ने भारत के विभिन्न भागों में एक बड़ा विपणन तंत्र तैयार किया था जहाँ उसके ब्राण्ड काफी प्रसिद्ध थे परख फूड्स के चार तेल शोधक केन्द्र भी थे जिस पर अब कारगिल का नियंत्रण हो गया है


​​​​​​​⚬​​​​​​​ अब कारगिल 50 लाख पैकेट प्रतिदिन निर्माण क्षमता के साथ भारत में खाद्य तेलों की सबसे बड़ी उत्पादक कंपनी है वास्तव में कई बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की संपत्ति विकासशील देशों की सरकारों के सम्पूर्ण बजट से भी अधिक है
​​​​​​​⚬​​​​​​​ बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ एक अन्य तरीके से उत्पादन नियंत्रित करती है विकसित देशों की बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ छोटे उत्पादकों को उत्पादन का ऑर्डर देती हैं


​​​​​​​⚬​​​​​​​ वस्त्र, जूते-चप्पल एवं खेल के सामान ऐसे उद्योग हैं जहाँ विश्वभर में बड़ी संख्या में छोटे उत्पादकों द्वारा उत्पादन किया जाता है बहुराष्ट्रीय कंपनियों को इन उत्पादों की आपूर्ति की जाती है फिर इन्हें अपने ब्राण्ड नाम से ग्राहकों को बेचती हैं
​​​​​​​⚬​​​​​​​ इन बड़ी कंपनियों में दूरस्थ उत्पादकों के मूल्य, गुणवत्ता, आपूर्ति और श्रम-शर्तों का निर्धारण करने की प्रचण्ड क्षमता होती है

❏ बहुराष्ट्रीय कपंनियाँ द्वारा अपने उत्पादन कार्य का प्रसार व विश्व के कई देशों की स्थानीय कंपनियों के साथ पारस्परिक संबंध स्थापित करने के तरीके –


​​​​​​​⚬​​​​​​​ स्थानीय कंपनियों के साथ साझेदारी द्वारा आपूर्ति के लिए स्थानीय कंपनियों का इस्तेमाल करके
​​​​​​​⚬​​​​​​​ स्थानीय कंपनियों से निकट प्रतिस्पर्धा करके उन्हें खरीद कर बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ दूरस्थ स्थानों के उत्पादन पर अपना प्रभाव जमा रही हैं परिणामत: दूर-दूर स्थानों पर फैला उत्पादन परस्पर संबंधित हो रहा है

❏ विदेश व्यापार और बाजारों का एकीकरण :-


​​​​​​​⚬​​​​​​​ लम्बे समय से विदेशी व्यापार विभिन्न देशों को आपस में जोड़ने को मुख्य माध्यम रहा है इतिहास में अपने भारत और दक्षिण एशिया को पूर्व और पश्चिम के बाजारों से जोड़ने वाले व्यापार मार्गों और इन मार्गों से होने वाले गहन व्यापार के बारे में पढ़ा होगा व्यापारिक हितों के कारण ही व्यापारिक कंपनियाँ जैसे ईस्ट इंडिया कंपनी भारत की और आकर्षित हुई


​​​​​​​⚬​​​​​​​ विदेशी व्यापार का बुनियादी कार्य क्या है?


​​​​​​​⚬​​​​​​​ विदेशी व्यापार घरेलू बाजारों अर्थात् अपने देश के बाजारों से बाहर के बाजारों में पहुँचने के लिए उत्पादकों को एक अवसर प्रदान करता है उत्पादक केवल अपने देश के बाजारों में ही अपने उत्पाद नहीं बेच सकते हैं, बल्कि विश्व के अन्य देशों के बाजारों में भी प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं


​​​​​​​⚬​​​​​​​ इसी प्रकार दूसरे देशों में उत्पादित वस्तुओं के आयात से खरीददारों के समक्ष उन वस्तुओं के घरेलू उत्पादन के अन्य विकल्पों का विस्तार होता है सामान्यत: व्यापार के खुलने से वस्तुओं का एक बाजार से दूसरे बाजार में आवागमन होता है


​​​​​​​⚬​​​​​​​ बाजार में वस्तुओं के विकल्प बढ़ जाते हैं दो बाजारों में एक ही वस्तु का मूल्य एक समान होने लगता है
​​​​​​​⚬​​​​​​​ अब दो देशों के उत्पादक एक दूसरे से हजारों मील दूर होकर भी एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर सकते है
​​​​​​​⚬​​​​​​​ इस प्रकार विदेश व्यापार विभिन्न देशों के बाजारों को जोड़ने या एकीकरण में सहायक होता है

❏ भारत में चीन के खिलौने :-


​​​​​​​⚬​​​​​​​ चीन के विनिर्मातओं को भारत में खिलौने निर्यात करने को एक अवसर का पता चलता है जहाँ खिलौने अधिक मूल्य पर बेचे जा रहे हैं
​​​​​​​⚬​​​​​​​ वे भारत को खिलौने निर्यात करना आरम्भ करते हैं
​​​​​​​⚬​​​​​​​ अब भारत में खरीददारों के पास भारतीय और चीनी खिलौनों के बीच चयन करने का विकल्प है


​​​​​​​⚬​​​​​​​ सस्ते दाम एवं नवीन डिजाइनों के कारण चीनी खिलौने भारतीय बाजारों में अधिक लोकप्रिय है
​​​​​​​⚬​​​​​​​ एक वर्ष में ही खिलौने की 70-80% प्रतिशत दुकानों में भारतीय खिलौनों का स्थान चीनी खिलौनों ने ले लिया है
​​​​​​​⚬​​​​​​​ अब भारत के बाजारों में खिलौने पहले की तुलना में सस्ते हैं यहाँ क्या हो रहा है?
​​​​​​​⚬​​​​​​​ व्यापार के कारण चीनी खिलौने भारत के बाजारों में आए


​​​​​​​⚬​​​​​​​ भारतीय और चीनी खिलौनों की प्रतिस्पर्धा में चीनी खिलौने बेहतर साबित हुए
​​​​​​​⚬​​​​​​​ भारतीय खरीददारों के समक्ष कम कीमत पर खिलौनों के अपेक्षाकृत अधिक विकल्प है
​​​​​​​⚬​​​​​​​ इससे चीन के खिलौना निर्माताओं को अपना व्यवसाय फैलाने के लिए एक अवसर प्राप्त होता है
​​​​​​​⚬​​​​​​​ इसके विपरित भारतीय खिलौना निर्माताओं को हानि होती है क्योंकि उनके खिलौने कम बिकते हैं

वैश्वीकरण क्या है?


​​​​​​​⚬​​​​​​​ बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ विश्व में उन स्थानों की तलाश कर रही हैं जो उनके उत्पादन के लिए सस्ते हो साथ ही विभिन्न देशों के बीच विदेश व्यापार में भी तीव्र वृद्धि हो रही है


​​​​​​​⚬​​​​​​​ विदेश व्यापार का एक बड़ा भाग बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा नियंत्रित है जैसे –
​​​​​​​⚬​​​​​​​ भारत में फोर्ड मोटर्स का कार संयंत्र केवल भारत के लिए ही कारों का निर्माण नहीं करता
​​​​​​​⚬​​​​​​​ वह अन्य विकासशील देशों को कारें और विश्व भर में अपने कारखानों के लिए कार-पुर्जों का भी निर्यात करता है
​​​​​​​⚬​​​​​​​ इसी प्रकार अधिकांश बहुराष्ट्रीय कंपनियों के क्रियाकलाप में वस्तुओं और सेवाओं का बड़े पैमाने पर व्यापार शामिल होता है
​​​​​​​⚬​​​​​​​ वैश्वीकरण – अधिक विदेशी व्यापार और अधिक विदेशी निवेश के परिणामस्वरूप विभिन्न देशों के बाजारों एवं उत्पादनों में एकीकरण हो रहा है


​​​​​​​⚬​​​​​​​ विभिन्न देशों के बीच परस्पर संबंध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया ही वैश्वीकरण है
​​​​​​​⚬​​​​​​​ वैश्वीकरण की प्रक्रिया में मुख्य भूमिका- बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ – विभिन्न देशों के बीच अधिक से अधिक वस्तुओं, सेवाओं, निवेश और प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान हो रहा है


​​​​​​​⚬​​​​​​​ पिछले कुछ दशकों की तुलना में विश्व के अधिकांश भाग एक-दुसरे के अधिक सम्पर्क में आए हैं
​​​​​​​⚬​​​​​​​ वस्तुओं, सेवाओं, निवेशों और प्रौद्योगिकी के अलावा विभिन्न देशों को आपस में जोड़ने का एक और माध्यम है – विभिन्न देशों के बीच लोगों का आवागमन
​​​​​​​⚬​​​​​​​ लोगों के आवागमन के कारण –  बेहतर आय, रोजगार एवं शिक्षा की तलाश पिछले कुछ दशकों में अनेक प्रतिबंधो के कारण विभिन्न देशों के बीच लोगों के आवागमन में अधिक वृद्धि नहीं हुई है

❏ वैश्वीकरण को संभव बनाने वाले कारक :-

1. प्रौद्योगिकी – 

प्रौद्योगिकी में तीव्र उन्नति ने वैश्वीकरण की प्रक्रिया को बढाया है
​​​​​​​⚬​​​​​​​ जैसे पिछले 50 वर्षों में परिवहन प्रौद्योगिकी में बहुत उन्नति हुई है
​​​​​​​⚬​​​​​​​ इसने लम्बी दूरियों तक वस्तुओं की तीव्रतर आपूर्ति को कम लागत पर संभव किया है
​​​​​​​⚬​​​​​​​ वस्तुओं के परिवहन के लिए कंटेनर :- वस्तुओं को कंटेनरों में रखा गया है जिससे इन्हें जहाजों, रेलों, वायुयानों एंव ट्रकों पर बिना क्षति के लादा जा सके


​​​​​​​⚬​​​​​​​ कंटेनरों से ढुलाई-लागत में भारी बचत हुई और माल को बाजारों तक पहुँचाने की गति में वृद्धि हुई है
​​​​​​​⚬​​​​​​​ इसी प्रकार वायु यातायात की लागत में गिरावट आयी है
​​​​​​​⚬​​​​​​​ परिणामत: वायुमार्ग से अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में वस्तुओं का परिवहन संभव हुआ है

2. सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का विकास


​​​​​​​⚬​​​​​​​ वर्तमान समय में दूरसंचार, कंप्यूटर और इंटरनेट के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी द्रुत गति से परिवर्तित हो रही है
​​​​​​​⚬​​​​​​​ दूरसंचार सुविधाओं (टेलीग्राफ, टेलीफोन, मोबाईल फोन एवं फैक्स) का विश्व भर में एक – दूसरे से सम्पर्क करने सूचनाओं को तत्काल प्राप्त करने और दूरवर्ती क्षेत्रों से संवाद करने में प्रयोग किया जाता है


​​​​​​​⚬​​​​​​​ ये सुविधाएँ संचार उपग्रहों द्वारा सुगम हुई है जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में कंप्यूटरों का प्रवेश हो गया है
​​​​​​​⚬​​​​​​​ इंटरनेट के चमत्कारों को भी देखा है जहाँ जो कुछ भी जान सकते है सूचनाओं को आपस में बाँट सकते है
​​​​​​​⚬​​​​​​​ इंटरनेट से हम तत्काल इलेक्ट्रॉनिक डाक (ई-मेल) भेज सकते हैं अत्यंत कम मूल्य पर विश्व-भर में बात (वॉयस मेल) कर सकते हैं

विदेश व्यापार तथा विदेशी निवेश का उदारीकरण :-


 हम भारत में चीनी खिलौनों के आयात वाले उदाहरण पर वापस लौटते हैं
 भारत सरकार खिलौनों के आयात पर कर लगती है तब क्या होगा?
 इसका अर्थ है कि जो इन खिलौनों का आयात करना चाहते हैं, उन्हें इन पर कर देना होगा
 कर के कारण खरीददारों को आयातित खिलौनों की अधिक कीमत चुकानी होगी
 चीन के खिलौने अब भारत के बाजारों में इतने सस्ते नहीं रह जाएँगे चीन से उनका आयात स्वत: कम हो जाएगा
 भारत के खिलौना-निर्माता अधिक समृद्ध हो जाएँगे


 आयात पर कर व्यापार अवरोधक का एक उदाहरण है इसे अवरोधक इसलिए कहा गया है क्योंकि यह कुछ प्रतिबंध लगाता है
 सरकारें व्यापार अवरोधक का प्रयोग विदेश व्यापार में वृद्धि या कटौती (नियमित करने) करने के लिए करती है
 देश में किस प्रकार की वस्तुएँ कितनी मात्रा में आयातित होनी चाहिए यह निर्णय करने के लिए कर सकती हैं
 स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने विदेश व्यापार एवं विदेशी निवेश पर प्रतिबंध लगा रखा था
 देश के उत्पादकों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से संरक्षण प्रदान करने के लिए यह अनिवार्य माना गया
 1950 और 1960 के दशकों में उद्योगों का उदय हो रहा था और इस अवस्था में आयात से प्रतिस्पर्धा इन उद्योगों को बढ़ने नहीं देती


 इसीलिए भारत के केवल अनिवार्य चीजों जैसे – मशीनरी, उर्वरक और पेट्रोलियम के आयात की ही अनुमति दी
 सभी विकसित देशों ने विकास के प्रारंभिक चरणों में घरेलू उत्पादकों को विभिन्न तरीकों से संरक्षण दिया है
 भारत में करीब सन् 1991 के प्रारंभ से नीतियों में कुछ दूरगामी परिवर्तन किए गए
 सरकार ने यह निश्चय किया कि भारतीय उत्पादकों के लिए विश्व के उत्पादकों से प्रतिस्पर्धा करने का समय आ गया है
 यह महसूस किया गया कि प्रतिस्पर्धा से देश में उतपादकों के प्रदर्शन में सुधार होगा
 क्योंकि उन्हें अपनी गुणवत्ता में सुधार करना होगा
 इस निर्णय का प्रभावशाली अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने समर्थन किया


 अत: विदेशी व्यापार एवं विदेशी निवेश पर से अवरोधो को काफी हद तक हटा दिया गया
 इसका अर्थ है कि वस्तुओं का आयात-निर्यात सुगमता से किया जा सकता था और विदेशी कपंनियाँ यहाँ अपने कार्यालय और कारखाने स्थापित कर सकती थीं
 उदारीकरण – सरकार द्वारा अवरोधों अथवा प्रतिबंधो को हटाने की प्रक्रिया उदारीकरण के नाम से जानी जाती है
 व्यापार के उदारीकरण से व्यावसायियों को मुक्त रूप से निर्णय लेने की अनुमति मिली है कि वे क्या आयात या निर्यात करना चाहते हैं
 सरकार पहले की तुलना में कम नियंत्रण करती है और इसलिए उसे अधिक उदार कहा जाता है

विश्व व्यापार संगठन :-


 प्रभावशाली अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों ने भारत में विदेशी व्यापार एवं विदेशी निवेश के उदारीकरण का समर्थन किया
 इन संगठनों का मानना है कि विदेशी व्यापार और निवेश पर सभी अवरोधक हानिकारक हैं
 कोई अवरोधक नहीं होना चाहिए
 देशों के बीच मुक्त व्यापार होना चाहिए
 ​​​​​​विश्व के सभी देशों को अपनी नीतियाँ उदार बनानी चाहिए

विश्व व्यापार संगठन (W.T.O.) –


 उद्देश्य – अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना है
 विकसित देशों की पहल पर शुरू किया गया विश्व व्यापार संगठन अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से संबंधित नियमों को निर्धारित करता है कि इन नियमों का पालन हो
 विश्व व्यापार संगठन के सदस्य – 160 देश
 विश्व व्यापार संगठन सभी देशों को मुक्त व्यापार की सुविधा देता है
 व्यवहार में यह देखा गया है कि विकसित देशों ने अनुचित ढंग से व्यापार अवरोधकों को बरकरार रखा है
 दूसरी और विश्व व्यापार संगठन ने नियमों ने विकासशील देशों के व्यापार अवरोधों को हटाने के लिए विवश किया है
 जैसे – कृषि उत्पादों के व्यापार पर वर्तमान बहस है

भारत में वैश्वीकरण का प्रभाव :-


 पिछले 20 वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था के वैश्वीकरण ने एक लम्बी दूरी तय की है
 इसका लोगों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा है?
 वैश्वीकरण और स्थानीय विदेशी उत्पादकों के बीच वृहतर प्रतिस्पर्धा से उपभोक्ताओं विशेषकर शहरी क्षेत्र में धनी वर्ग के उपभोक्ताओं को लाभ हुआ है
 इन उपभोक्ताओं के सामने पहले से अधिक विकल्प है


 वे अब अनेक उत्पादों की अच्छी गुणवत्ता और कम कीमत से लाभान्वित हो रहे हैं
 परिणामत: ये लोग पहले की तुलना में आज अपेक्षाकृत उच्चतर जीवन स्तर का आनन्द ले रहे हैं
 उत्पादों और श्रमिकों पर वैश्वीकरण का एक समान प्रभाव नहीं पड़ा है

उत्पादकों और श्रमिकों पर वैश्वीकरण का प्रभाव :-


 पिछले 20 वर्षों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत में अपने निवेश में वृद्धि की है
 भारत में निवेश करना उनके लिए लाभप्रद रहा है
 बहुराष्ट्रीय कंपनियों के शहरी इलाकों में रूची वाले उद्योग – सेलफोन, मोटर गाड़ियों, इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों, ठंडे पेय पदार्थों, जंक खाद्य पदार्थों एवं बैंकिंग


 इन उत्पादों के अधिकांश खरीददार संपन्न वर्ग के लोग हैं
 इन उद्योगों और सेवाओं में नये रोजगार उत्पन्न हुए हैं
 साथ ही इन उद्योगों को कच्चे माल इत्यादि की आपूर्ति करने वाली स्थानीय कंपनियाँ समृद्ध हुई ¬ अनेक बड़ी भारतीय कंपनियाँ बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा से लाभान्वित हुई हैं


 इन कंपनियों ने नयी प्रौद्योगिकी और उत्पादन प्रणाली में निवेश किया और अपने उत्पादन के स्तर को ऊँचा उठाया है
 कुछ ने विदेशी कंपनियों के साथ सफलतापूर्वक सहयोग कर लाभ अर्जित किया
 वैश्वीकरण ने कुछ बड़ी भारतीय कंपनियों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के रूप में उभरने के योग्य बनाया है
 जैसे – टाटा मोटर्स (मोटरगाड़ियाँ), इंफोसिस (आई. टी.), रैनबैक्सी (दवाइयाँ), एशियन पेंट्स (पेंट), सुंदरम फास्नर्स (नट और बोल्ट)


 वैश्वीकरण ने सेवा प्रदाता कंपनियों विशेषकर सूचना और प्रौद्योगिकी वाली कंपनियों के लिए नये अवसरों का सृजन किया है
 भारतीय कंपनी द्वारा लंदन स्थित कंपनी के लिए पत्रिका का प्रकाशन और कॉल सेंटर इसके उदाहरण हैं इसके अतिरिक्त आँकड़ा प्रविष्टि (डाटा एन्ट्री), लेखाकरण, प्रशासनिक कार्य, इंजीनियरिंग जैसी कई सेवायें भारत जैसे देशों में अब सस्ते में उपलब्ध हैं और विकसित देशों को निर्यात की जाती है

 
 ​​​​​​​​​​​​​​ये परिस्थितियाँ और श्रमिकों की कठिनाइयाँ भारत के अनेक औद्योगिक इकाइयों और सेवाओं में सामान्य बात हो गई है
 आज अधिकांश श्रमिक असंगठित क्षेत्र में नियोजित हैं
 यही नहीं संगठित क्षेत्र में क्रमश: कार्य – परिस्थितियाँ असंगठित क्षेत्र के समान होती जा रही है
 संगठित क्षेत्रक के श्रमिकों जैसे सुशीला को अब कोई संरक्षण  और लाभ नहीं मिलता है, जिसका वह पहले उपभोग करती थी

न्याय संगत वैश्वीकरण के लिए संघर्ष :-


 वैश्वीकरण सभी के लिए लाभप्रद नहीं रहा है
 शिक्षित, कुशल और संपन्न लोगों ने वैश्वीकरण से मिले नये अवसरों का सर्वोत्तम उपयोग किया है
 दूसरी और अनेक लोगों को लाभ में हिस्सा नहीं मिला है
 वैश्वीकरण अब एक सच्चाई है

वैश्वीकरण को अधिक न्यायसंगत कैसे बनाया जा सकता?


 न्यायसंगत वैश्वीकरण सभी के लिए असवर प्रदान करेगा
 यह सुनिश्चित भी करेगा कि वैश्वीकरण के लाभों में सबकी हिस्सेदारी हो
 सरकार इसे संभव बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है
 इसकी नीतियों को केवल धनी और प्रभावशाली लोगों को ही नहीं बल्कि देश के सभी लोगों के हितों का संरक्षण करना चाहिए

सरकार द्वारा दिए जाने वाले कुछ उपायों है जैसे –


 सरकार यह सुनिश्चित कर सकती है श्रमिक कानूनों का उचित कार्यान्वयन हो
 श्रमिकों को अपने अधिकार मिले
 छोटे उत्पादकों के कार्य में सुधार के लिए मदद कर सकती है जब तक वे प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम न हो जायें
 जरूरी हो तो सरकार व्यापार और निवेश अवरोधकों का उपयोग करें
 ‘न्यायसंगत नियमों’ के लिए विश्व व्यापार संगठन से समझौते भी करें


 विश्व व्यापार संगठन में विकसित देशों के वर्चस्व के खिलाफ समान हितों वाले विकासशील देशों को मिलकर लड़ना चाहिये
 पिछले कुछ वर्षों में बड़े अभियानों और जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने विश्व व्यापार संगठन के व्यापार और निवेश से संबंधित महत्त्वपूर्ण निर्णयों को प्रभावित किया है
 यह प्रदर्शित करता है कि जनता भी न्यायसंगत वैश्वीकरण के संघर्ष में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है

NCERT Class 10 अर्थशास्त्र Chapter 4

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